बेरोज़गारी : कुशलता की कमी ?

पैसे कमाने के कितने तरीके है वो तो आप सब मुझसे बेहतर जानते है और बहुत से स्रोत भी है जहाँ से आप इस बारे में अत्यधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं परन्तु हम आज जिस विषय के बारे में चर्चा करने वाले है वो जुड़ा तो आर्थिक मुद्दे से ही है लेकिन उसकी वजह से आप ये जान पाएंगे की कोई उतने ही समय में ज्यादा कमा ले रहा है कोई बहुत ही कम फिलहाल हम इसको दो रूप में विभाजित करते हैं एक जो लोग समय के अनुरूप दाम लेते हैं दुसरे वो जो अपने कौशल के अनुरूप दाम लेते हैं उनसे समय से कोई लेना देना नहीं रहता

सर्वप्रथम हम समय अनुरूप दाम लेने वाले व्यक्तियों की बात करेंगे
अब यहाँ पर कौशल का होना तो आवश्यक होता है पर उसमे थोड़ा कम ज्यादा भी है तो चल जाता है यहाँ समय का मुख्या किरदार होता है जैसे हमारे अकुशल कारीगर होते है अब उनको केवल आठ घंटे कार्य करने से मतलब है फिर कार्य जो भी हो और उसके हिसाब से उनकी दैनिक राशि अदा होती है अब यदि उसी उतने कार्य को वो चार घंटे में कर दे तो फिर उनकी दैनिक राशि भी आधी हो जाएगी तो उदाहरण से आप समझ गए होंगे की यहाँ कार्य से ज्यादा उस कार्य को करने में कितना समय लगा ये महत्त्पूर्ण है कई बार हम इस आकड़े पर ज्यादा बात करते है की बेरोजगारी का आलम देश में बहुत भयावह हो गया है लाखों की तादाद में लोग बेरोज़गार ही है परन्तु हम इस पर बहुत ही कम चर्चा करते है की कितने प्रतिशत लोग कुशल है
मै टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार की एक खबर का जिक्र करना चाहूंगा 17 दिसंबर 2020 की खबर है “मानव विकास रिपोर्ट द्वारा रिलीज़ की गयी जिसमे भारत 129 वे स्थान पे रहा कुल 162 देशों में अकुशल श्रमिक की संख्या के हिसाब से

https://timesofindia.indiatimes.com/india/with-1-in-5-workers-skilled-india-ranks-129-among-162/articleshow/79769587.cms


एक और बेहतरीन वाक्य मै इसमें और जोड़ना चाहूंगा ” एक ऐसा देश जो अभी विकाशशील है जिसमे विकसित होने में अभी बहुत समय है वहां बेरोजगारी कैसे हो सकती है बल्कि वहां तो रोजगार के सृजन के अनेको उपाय और मौके हैं”
रोजगार के सृजन के लिए कुशलता आवस्यकत है कुशलता के लिए खुद के अधिक समय देना आवश्यक है और बस वही तो नहीं है हमरे पास क्यंकि हमारे तो रोम रोम में चौराहे वाले सामाजिकता घुस गयी है जहाँ बैठे बैठे हम पूरे देश विदेश के विभिन्न नियमो और कानूनों पर टीका टिप्पड़ी करते है और मजे की बात तो ये है की उस विषय पे या तो हमने कही किसी से सुना होता है या पहर थोड़ा बहुत पढ़ा क्योंकि किसी मुद्दे पर पूर्ण जानकारी लेना तो हमारे खून में ही नहीं है

तो अब हम कार्य अनुरूप दाम लेने वाले की बात कर लेते है
यहाँ वो व्यक्ति आते हैं जिन्होंने अपने जीवन का काफी बड़ा हिस्सा एक विशेष कार्य में पारंगत होने में लगा दिया अब ये जब भी उस कार्य को करेंगे तो ये राशि समय के हिसाब से नहीं कार्य के हिसाब से लेंगे तो उदाहरण के तौर पर एक इलेक्ट्रीशियन को ही ले लीजिये अब वो अगर काम करेगा तो वो कितना काम कर रहा इसका पैसा लेगा न की वो उसको कितने समय में कर रहा अच्छा यहाँ मै एक अंतर स्पष्ट कर दूँ की शिक्षा लेना कुशलता नहीं है आप उस शिक्षा का प्रयोग करने में काबिल हुए और यदि हुए तो उसका कितना बढ़िया उपयोग आप कर सकते है ये कुशलता है क्योकि आज के समय में बहुत कम ही ऐसे लोग मिलेंगे जो शिक्षा ग्रहण न कर रहे हो बस अब उस शिक्षा का कौन कितना बढ़िया इस्तेमाल करता है उसी से सारी कहानी बदल जाती है

यदि हिंदी लिखने में किन्ही शब्दों में कोई त्रुटि हो तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ